मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म

                     मानव धर्म

पृथ्वी की जब से रचना हुए तब से अनेक साधु संत महात्मा इस धरती पर  पधारे और अपने ज्ञान रूपी  प्रकाश से इस धरती  को  प्रकाशित किया। इसी परंपरा  में परम संत जी महाराज का अवतरण  हुआ  उन्होंने कठोर साधना करके मानवता  के उत्थान के लिए  अथक परिश्रम  किया  और सत्य  की  साधना  में  लोगों  को  लगाया । उन्होंने  अच्छे समाज के निर्माण के लिए मानवता का अभियान चलाया आज उसी क्रम में विचार.......

मानव शरीर अनमोल है।

नाम अनेक है धर्म अनेक है  उपदेश एक है ईश्वर एक है इससे बढ़कर आपके ऊपर कौन सी कृपा हो सकती है कि संसार में उसने सबसे पवित्राणव  मंदिर बाला जिस्म प्रदान किया मानव समाज में  मानव के  अनेक  प्रकार  के नाम के साथ मानव के अनेक प्रकार के धर्म हैं।

धर्म अनेक है  ग्रंथ अनेक  हैं शरीर एक  पैदा एक से है। मानव धर्म अनेक प्रकार होने के कारण उसके ग्रंथ  भी अनेक प्रकार के हैं। सभी  धर्म कर्म मानव के  शरीर  से  होते  हैं सभी  एक प्रकार से  पैदा हुए ।  इस  पवित्र  धरती पर कोई हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई बनकर पैदा नहीं होता केवल नर नारी बनकर पैदा होता है। अपने  धर्म  को ताकतवर  दिखाने  के लिए इन्हें हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई बनाया जाता है फिर आगे इन्हें उपध्रमों में विभक्त किया जाता है। धर्म के  ठेकेदार  पाप पुण्य स्वर्ग नरक दोजक जन्नत का झांसा देकर धर्म छोड़ने नहीं देते है।

अच्छे  करम  करने पर  स्वर्ग भी यहीं पर है बुरे कर्मों पर नरक भी  यहीं है। अतः  मानव  धर्म  अपनाकर  सदा सत्य ही बोलो सत्य मार्ग पर चलकर  देखो  स्वर्ग  या जन्नत  यहीं  पर है। बुरे करम करने पर नरक भी यहीं  पर है  बुढ़ापा आने पर पुत्र पुत्री इस पत्नी भी आपको छोड़कर  भाग  जायेंगे  गाली ताने देगें । फिर पछताने से क्या जब अपना  धर्म  भूल  गए  उस  उम्र  में मानवता को याद करोगे जब मानवता को मार दिया ।

एक मानव शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है और पांच तत्वों में विलीन हो जाता है। परिवार राजा पाट जमीन जायदाद सब यहीं पर छूट जाता  है अतः  सत्य  को  अपनाओ  मानव  धर्म बड़ाओ सभी एक रास्ते से इस संसार से मुक्त हों।

                                            helped by satypal ji

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